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अवैध शराब की खुलेआम बिक्री और आबकारी विभाग की दिखावटी कार्यवाहियों और खानापूर्ति कार्यवाही पर उठ रहे सवाल ?

 अवैध शराब की खुलेआम बिक्री और आबकारी विभाग की कार्यवाही पर उठ रहे सवाल स्वाभाविक हैं। जब अवैध कारोबारियों स्थानीय अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त होता है, 






तब विभाग द्वारा की जाने वाली दिखावटी कार्यवाहियों और खानापूर्ति को लेकर जनता का आक्रोशित होना लाजिमी है।  जिला आबकारी अधिकारी श्री अरविंद सागर के मार्गदर्शन में आबकारी विभाग द्वारा वृत नर्मदापुरम शहर के विभिन्न संदिग्ध स्थलों पर आकस्मिक दबिश दी गई। आबकारी विभाग की टीम द्वारा बंगाली कॉलोनी, ग्वाल टोली एवं ईदगाह मोहल्ला क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34(1) के तहत 08 प्रकरण कायम किए गए।

कार्रवाई के दौरान 90 पाव प्लेन मदिरा, 38 लीटर हाथभट्टी मदिरा तथा लगभग 670 किलोग्राम महुआ लाहन जप्त किया गया। समस्त प्रकरणों में जप्त मदिरा एवं सामग्री की अनुमानित कीमत लगभग 79 हजार 440 रुपये आंकी गई है। यह कार्रवाई वृत्त प्रभारी एवं सहायक जिला आबकारी अधिकारी श्री रमेश अहिरवार के नेतृत्व में संपन्न की गई। कार्रवाई में मुख्य आरक्षक रघुवीर प्रसाद निमोदा, दुर्गाप्रसाद माँझी, आरक्षक सुरेश सिकेरिया एवं नगर सैनिक राम अवतार का सहयोग  रहा।


संरक्षण और मिलीभगत की हकीकत
  • कई बार स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के कारण आबकारी विभाग केवल चुनिंदा या छोटे मामलों में ही कार्रवाई करता है, जिससे बड़े माफिया पर्दे के पीछे सुरक्षित रहते。
  • जब लगातार शिकायतों के बावजूद अवैध कारोबार फल-फूल रहा हो, तो सांठगांठ के आरोप लगना आम बात दिखावटी कार्यवाही क्यों लगती है?
  • अक्सर विभाग द्वारा की जाने वाली छापेमारी में केवल 'महुआ लाहन' (कच्ची शराब का कच्चा माल) या शराब की छोटी खेप ही नष्ट की जाती है। मुख्य सरगना या सिंडिकेट तक पहुंचना अक्सर मुश्किल हो जाता है, जिससे आम जनता को यह केवल एक दिखावा लगता。?

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