स्कूलों के सामने मनमानी
प्रदेश स्तर से जारी किए गए पिछले दिनों आदेश जारी किया था
कि कोई भी स्कूल संचालक स्कूल के बाहर से बच्चों की आवाजाही की अनुमति नहीं देगा।
बच्चे जब स्कूल पहुंचें और छुट्टी के बाद वे जब बाहर जाएं तो वाहनों में ही बैठकर निकलें।
यानी स्कूल के बाहर वाहनों की पार्किंग न हो बल्कि स्कूल के अंदर से ही बच्चों को बैठाया और उत्तारा जाए।
इस आदेश की खिल्ली उड़ाते हुए रोजाना ही दर्जनों स्कूल प्रबंधन सड़कों को पार्किंग बना देते हैं
और वाहनों की कतार लग जाती है। इस दौरान सुरक्षा को ताक पर रखते हुए बच्चों को भारी वाहनों के बीच में से
अपना रास्ता खोजते हुए जाना पड़ता है। आम राहगीर भी स्कूल छूटते समय जाम में फंस जाता है।
कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने नए सत्र के प्रारंभ में ही आदेश जारी किए थे कि स्कूलों के बाहर वाहनों को खड़ा न किया जाए।
बच्चों को स्कूलों के अंदर ही वाहनों से उतारा जाए और अंदर से ही वाहनों में बैठाकर मुख्य सड़क पर लाया जाए।
इस आदेश के बाद भी निजी स्कूल संचालकों ने मनमानी शुरू कर दी है। स्कूल छूटने के घंटों पहले से ही वाहनों की कतारें स्कूल के बाहर लग जाती हैं।
इससे राहगीरों को भारी मुसीबत उठानी पड़ती है। स्कूल छूटते ही बच्चे सड़कों पर दौड़ते नजर आते हैं,
वे कभी वाहनों से टकराते हैं तो कभी दौड़ते हुए गिर जाते हैं। स्कूल प्रबंधन पूरी तरह से शांत रहता है और
ऐसा दिखावा किया जाता है कि बच्चे स्कूल के गेट से बाहर हो गए, यानी अब उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं।
इसके साथ ही दोपहिया और निजी कारों के कार
सड़क पर आवाजाही पूरी तरह से बंद हो जाती है।
बच्चों को भेड़-बकरी की तर्ज पर छोड़ दिया जाता है। वे बेचारे बचते बचाते अपने वाहनों तक पहुंच पाते हैं।
यदि किसी को जरूरत पड़ जाए तो एम्बुलेंस तक नहीं निकल पाती।
स्कूल छूटते समय सड़क पर पूरी तरह से स्कूली वाहनों का कब्जा हो जाता है
और दोनों तरफ जाम की नौबत आ जाती है। लेकिन इसके बाद भी स्कूल प्रबंधन द्वारा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।