अनुभूति शिविर के द्वितीय दिवस में छात्राओं ने प्रकृति संरक्षण का लिया संकल्प
बरगोंदी वन क्षेत्र में हुआ आयोजन, “हम हैं धरती के दूत” थीम पर दिया गया संदेश
नर्मदापुरम 25/12/2025 (छगन कुशवाहा पिपरिया) नर्मदापुरम् पिपरिया
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, नर्मदापुरम् अंतर्गत पिपरिया बफर परिक्षेत्र में संचालित अनुभूति शिविर के द्वितीय दिवस का आयोजन बुधवार को बरगोंदी वन क्षेत्र में किया गया। शिविर में शासकीय कन्या शाला पिपरिया की लगभग 120 छात्राएं एवं शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हुईं। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को प्रकृति, वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा।
शिविर को संबोधित करते हुए क्षेत्र संचालक सतपुड़ा टाइगर रिजर्व नर्मदापुरम् श्रीमती राखीनंदा ने इस वर्ष की अनुभूति थीम “हम हैं धरती के दूत” पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अनुभूति कार्यक्रम हर वर्ष बच्चों को प्रकृति के और करीब ले जाता है। धरती के दूत बनने का अर्थ है जंगल को समझना, उसका संरक्षण करना और समाज को वनों, वन्यजीवों एवं पशु-पक्षियों की रक्षा का संदेश देना।
उन्होंने कहा कि हर पेड़ को मित्र मानना, हर जीव के जीवन का सम्मान करना, प्रदूषण से प्रकृति को बचाना और जंगल व जमीन का समझदारी से उपयोग करना हम सभी का दायित्व है। इन आदतों को स्कूल, घर और समाज तक पहुंचाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, हरी-भरी और सुरक्षित धरती छोड़ना हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
सहायक संचालक पिपरिया आशीष खोब्रागड़े ने अपने उद्बोधन में जल संरक्षण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चींटी से बेहतर कोई जल-संग्रहण का उदाहरण नहीं है। वह हमें सिखाती है कि पानी का संरक्षण किस प्रकार किया जा सकता है, जिससे हमें सीख लेनी चाहिए।
परिक्षेत्र अधिकारी पिपरिया बफर श्री प्यारेलाल डोयरे, अन्य वन अमले की उपस्थिति में सहायक संचालक द्वारा वन्यजीव, पर्यावरण संरक्षण एवं लाइफ मिशन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
अनुभूति मास्टर ट्रेनर एवं प्रेरक राजेश पटेल (वनरक्षक) तथा अन्य प्रेरकों दीपक साहू, गोपाल चौहान आदि द्वारा “मैं भी बाघ” एवं “हम हैं बदलाव” थीम के माध्यम से पारिस्थितिक तंत्र में वन, वन्यजीव और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को सरल भाषा में समझाया गया। बच्चों को विभिन्न जीव-जंतुओं के पारस्परिक संबंधों की जानकारी दी गई।
प्रकृति पथ भ्रमण के दौरान छात्राओं को विभिन्न वृक्षों की पहचान, वन्यजीवों एवं उनके साक्ष्य, कैमरा ट्रैप, पक्षी दर्शन, मृग एवं हिरण प्रजातियों में अंतर, दीमक की बामी और मकड़ी के जाल के महत्व के बारे में बताया गया। लाइफ मिशन के अंतर्गत दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव कर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने के महत्व को भी समझाया गया।
शिविर में बिना सिले कपड़े से थैली बनाना सिखाया गया, “मैं भी बाघ” एवं “हम हैं बदलाव” गीत पर नृत्य कराया गया तथा निबंध, चित्रकला एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया और अंत में अनुभूति की शपथ भी दिलाई गई।
कार्यक्रम के दौरान वर्ल्ड कप विजेता सुनीता सराठे का भी अनुभूति शिविर में सम्मान किया गया।
अनुभूति शिविर के माध्यम से छात्राओं ने प्रकृति संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए धरती के दूत बनने का संकल्प लिया।



