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| श्री ब्रम्हचारीजी महाराज |
सत्संग का अर्थ आत्मा का धर्मात्मा से जुड़ना है : ब्रह्मचारी जी महाराज
नर्मदापुरम् 27/1/206(छगन कुशवाहा पिपरिया) नर्मदापुरम्
पिपरिया, नगर में आयोजित हो रहे रामचरित मानस यज्ञ–2026 के अंतर्गत ज्ञान, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्म लाभ प्राप्त करने पहुंच रहे हैं। यज्ञ परिसर में अपार जनसमूह की उपस्थिति नगर की धार्मिक चेतना को सजीव कर रही है।

श्रोता गण प्रवचन का लाभ लेते हुए

मांगरोल घाट से पधारे ब्रह्मचारी जी महाराज ने व्यासपीठ से प्रवचन देते हुए कहा कि “आत्मा के साथ होना, धर्मात्मा के साथ होना ही सत्संग है।” उन्होंने भगवान श्रीराम को परिभाषित करते हुए कहा कि जो बीत गया वह भी राम है, जो वर्तमान में है वह भी राम है और जो भविष्य में होगा वह भी राम है—तीनों कालों में केवल राम ही राम हैं।
इससे पूर्व प्रयागराज से पधारे श्री शिवम शुक्ला जी ने ध्वजा और पताका के बीच का अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि पताका ध्वजा से श्रेष्ठ होती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपनी योग्यता का झंडा नहीं, बल्कि विनम्रता की पताका फहरानी चाहिए।
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| विंध्य पीठाधीशवर जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री लक्ष्मणाचार्य जी "महाराज" |
वहीं विद्वान जगतगुरु महाराज लक्ष्मणाचार्य जी ने सफलता के मूल मंत्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में उन्नति का सबसे बड़ा आधार गुरु का आश्रय है।
रात्रिकालीन सत्र में अयोध्याधाम से पधारी सुश्री शांतिश्रिया जी ने देश की माटी और भारत भूमि की महत्ता पर भावपूर्ण विचार रखे। इगनघाट से पधारे विद्वान वक्ता श्री सुरेशचन्द्र जी महाराज ने “यही दीन प्यारे, वेद पुकारे” विषय का आज के जीवन से जोड़ते हुए गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया।
उल्लेखनीय है कि नगर में 72 वर्षों से चली आ रही इस गौरवशाली परंपरा में प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ता जा रहा है। जनसेवा की भावना के साथ नगर की स्व-सेवी संस्थाएं भी व्यवस्थाओं में बढ़-चढ़कर सहभागिता निभा रही हैं। पूरा नगर इन दिनों राममय वातावरण में सराबोर है।






