पिपरिया में रामचरित मानस सम्मेलन यज्ञ एवं नवान्ह पारायण
आज की युवा पीढ़ी दिशाओं से भटक रही है : पं.पू. आचार्य शांति श्रिया
नर्मदापुरम् 29/1/206(छगन कुशवाहा पिपरिया) नर्मदापुरम्
पिपरिया,नगर में आयोजित रामचरित मानस सम्मेलन यज्ञ एवं नवान्ह पारायण के अवसर पर व्यासपीठ से पं.पू. आचार्य शांति श्रिया जी ने आज की युवा पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का आह्वान किया। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि आधुनिकता और भौतिकता की अंधी दौड़ में आज की युवा पीढ़ी अपनी सही दिशा से भटकती जा रही है, जिससे सामाजिक एवं पारिवारिक मूल्यों में गिरावट देखने को मिल रही है।
आचार्य शांति श्रिया जी ने विशेष रूप से बेटियों को संबोधित करते हुए भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि “बेटियाँ अपने पिता को कन्यादान रूपी इस महान यज्ञ से वंचित न करें। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि पिता के जीवन का सबसे पवित्र और गौरवपूर्ण क्षण होता है।”
उन्होंने बताया कि कन्यादान केवल एक सामाजिक रस्म नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक यज्ञ है, जिसमें माता-पिता अपने जीवन की अमूल्य धरोहर समाज और धर्म के संरक्षण हेतु समर्पित करते हैं।
प्रवचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। उपस्थित जनसमुदाय ने आचार्य जी के विचारों को आत्मसात करते हुए सनातन संस्कारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। आयोजन स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा और रामचरित मानस के सस्वर पाठ से पूरा परिसर भक्तिरस में डूबा रहा।
