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युवा जननायक आकाश राजपूत ने दिया एकता और समरसता का संदेश हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता, शहर में गूँजे जयकारे |
भोपाल 15/11/2025 (दयाराम कुशवाहा ) भोपाल,सागर। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा दिल्ली से वृंदावन तक निकाली जा रही सनातन हिंदू एकता पदयात्रा के प्रेरक प्रभाव से शनिवार को सागर में सनातन सद्भाव संगठन के नेतृत्व में विशाल सनातन हिंदू एकता पदयात्रा निकाली गई। पीटीसी ग्राउंड से शुरू हुई यह यात्रा सिविल लाइन चौराहा, गोपालगंज मुख्य चौराहा होते हुए वृंदावन मठ पहुँची। पूरे मार्ग में शहर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।यात्रा के दौरान “बागेश्वर धाम सरकार” और “जय श्रीराम” के जयकारों से शहर गूँज उठा। जगह–जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, जल-अभिषेक और स्वागत कर पदयात्रा का अभिनंदन किया। अनुशासन और विशाल जनसैलाब के साथ यह यात्रा शहर की अब तक की सबसे प्रभावशाली धार्मिक रैलियों में शामिल रही।
“हिंदू एकता केवल नारा नहीं, हमारी पहचान”—आकाश राजपूत
यात्रा में युवाओं के केंद्र बिंदु बने आकाश राजपूत ने संबोधन में कहा कि सनातन हिंदू एकता किसी कार्यक्रम भर का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और जीवन मूल्यों की आत्मा है। उन्होंने कहा, “जहाँ-जहाँ सनातन है, वहाँ- वहाँ एकता है। ‘वासुदेव कुटुम्बकम्’ हमें बताता है कि विश्व हमारा परिवार है।”
“बागेश्वर महाराज का तप हम सभी के लिए प्रेरणा”—आकाश सिंह राजपूत
आकाश सिंह राजपूत ने पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सतत प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गुरुदेव देशभर में सनातन की शक्ति जागृत करने के लिए कठिन तप और अविरत यात्राएँ कर रहे हैं। मौसम, मार्ग और थकान की परवाह किए बिना उनका यह समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणादायी है।
उन्होंने सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए कहा कि जाति, ऊँच–नीच, भाषावाद और क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर एक परिवार की तरह आगे बढ़ना ही राष्ट्र को संगठित और मजबूत बनाता है।
संगठनों की बड़ी भूमिका, कार्यकर्ताओं का योगदान
सनातन सद्भाव संगठन के जिला अध्यक्ष रितेश ठाकुर के मार्गदर्शन में आयोजन बेहद सफल रहा। कई हिंदू संगठनों ने सक्रिय सहयोग दिया।
प्रमुख रूप से गोलू घोषी, शुभम घोषी, संतोष राय, मिश्री चंद्र गुप्ता, अनिल सेन, अंकु चौरसिया, अंकित तिवारी, शशांक सिंह राजपूत, राहुल कोसी, कार्तिक तिवारी, जीतू यादव, अमन गौतम, आशीष साहू, अंकित सेन सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और स्वयंसेवक यात्रा में शामिल रहे।
ऐतिहासिक बनी पदयात्रा
हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति, अनुशासन और भक्ति ने इस पदयात्रा को ऐतिहासिक स्वरूप दिया। यात्रा ने सागर की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को पूरे प्रदेश के सामने एक नई पहचान दी। यह आयोजन सिर्फ आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की उस भावना का प्रतीक भी रहा, जो समाज को जोड़ती है और आगे बढ़ने की दिशा दिखाती है।
