शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब, नगर में हुआ भव्य स्वागत
नर्मदापुरम 30/11/2025 (छगन कुशवाहा पिपरिया) नर्मदापुरम् पिपरिया,
नगर के लिए अति विशिष्ट सौभाग्य और आध्यात्मिक हर्ष का विषय है कि उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर, पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य अनंत श्री विभूषित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज (१००८) का दिव्य आगमन 29 नवंबर (शनिवार) प्रातः 9:30 बजे पिपरिया में हुआ।
पूज्य स्वामीजी के दो दिवसीय सानिध्य का लाभ लेने हजारों श्रद्धालु सिलारी चौक से दुर्गा मंदिर चौराहे तक निकली शोभायात्रा में शामिल हुए। गौमाता राष्ट्रमाता के उद्घोष के साथ प्रारंभ हुई यात्रा ने नगर को धर्ममय बना दिया।
तीन घंटे तक गूंजा—“हर हर महादेव”, “जय मां कामेश्वरी”
शोभायात्रा में जगह-जगह सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
मंगलवारा चौक पर विधायक ठाकुरदास नागवंशी और नपाध्यक्ष नीना नागपाल ने नगर की ओर से विशेष अभिनंदन किया।
दुर्गा मंदिर चौराहे पर हजारों की उपस्थिति में पूज्य स्वामीजी का भव्य स्वागत हुआ। यहाँ स्वामीजी ने शेरावाली माता रानी का पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद प्रदान किया।
धर्म प्रबोधन, संगोष्ठी व दीक्षा कार्यक्रम
29 नवम्बर, शनिवार (सायं 3:30 से 5:30)
धर्म प्रबोधन एवं संगोष्ठी
30 नवम्बर, रविवार (प्रातः 11:00 से 1:00)
धर्म प्रबोधन एवं दीक्षा
30 नवम्बर, रविवार सायं 4:00 बजे
पूज्यपाद स्वामीजी के दिव्य आशीर्वचन
सायं 6:00 बजे
पादुका पूजन, गुरु स्तुति एवं आरती
रुद्राभिषेक व रुद्र स्वाहाकार का पंचदिवसीय अनुष्ठान
अखिल ब्रह्माण्ड नायिका मां कामेश्वरी एवं भगवान कामेश्वर शिव की असीम कृपा से 26 से 30 नवंबर तक जायसवाल भवन, इतवार बाजार में श्रद्धा से भरे आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए—
रुद्राभिषेक – प्रतिदिन प्रातः 8:30 से दोपहर 1:00
रुद्र स्वाहाकार – सायं 3:00 से 6:00
संध्या आरती – 7:30
पूर्णाहुति – 30 नवंबर, रविवार सायं 4:00 बजे
1 दिसंबर—माता अन्नपूर्णा का प्रसाद
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी पर 1 दिसंबर को दोपहर 12 बजे से भक्तों को माता अन्नपूर्णा का प्रसाद वितरित होगा।
सनातन की ओर लौटने का आह्वान
पूरे आयोजन ने नगर में ऐसा आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया, जिससे युवा और बुजुर्ग—दोनों में धर्म के प्रति नई ऊर्जा जागृत हुई।
पूज्यपाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने प्रवचनों में कहा कि—
“सनातन धर्म मानव जीवन को दिव्य दिशा देता है। धर्म से जुड़ना केवल पूजा नहीं, बल्कि राष्ट्र, समाज और संस्कृति की रक्षा है।”
भक्ति, श्रद्धा, आध्यात्मिक ज्ञान और संस्कृति की छटा से सजा यह आयोजन लंबे समय तक नगरवासियों के हृदय में स्मरणीय रहेगा।
