भोपाल 30/11/2025 (दयाराम कुशवाहा )पिपरिया। नगर आज धार्मिक उत्साह, आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति-भाव से सराबोर रहा। उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य श्री अविमुक्तानंद जी के आगमन पर श्रद्धालुओं ने ऐसा स्वागत किया, जैसा शहर ने वर्षों बाद देखा। मुख्य मार्गों से लेकर स्वागत स्थल तक “हर हर नर्मदे”, “हर-हर महादेव”, “जय गोमाता” और वैदिक मंत्रोच्चार की अनुगूंज माहौल को दिव्यता से भरती रही।
सुबह से ही ग्रामीणों, महिला मंडलों, संत समाज और युवाओं की टोलियाँ हाथों में केसरिया ध्वज, पुष्पहार और स्वागत-पट्टिकाएँ लेकर मार्गों पर डट गईं। शंकराचार्य जी का वाहन जैसे ही पिपरिया सीमा में पहुँचा, शहर ने गगनभेदी नारों के साथ उनका अभिनंदन किया। रास्तेभर पुष्पवर्षा, ढोल-नगाड़ों की गूंज और कलश-आरती से अद्भुत दृश्य बन गया।
मुख्य आकर्षण
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पारंपरिक ढोल-नगाड़ों से स्वागत
कन्याओं द्वारा कलश-आरती और पुष्पवर्षा
साधु-संतों और श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति
नगर के प्रमुख मार्गों पर आकर्षक स्वागत तोरण
स्थानीय नागरिकों और संत समाज ने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तानंद जी का पिपरिया आगमन नगर के आध्यात्मिक इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। लोगों को विश्वास है कि उनके आशीर्वचन से समाज में धर्म, कर्तव्य और संस्कारों के प्रति नई चेतना जागृत होगी।
शंकराचार्य जी का संदेश
अपने प्रवचन में उन्होंने कहा—
“धर्म केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि जीवन को पवित्र, दृढ़ और समाजहितकारी बनाने का मार्ग है। भारत की आत्मा गाँवों में बसती है, और वहीं के लोग हमारी सनातन संस्कृति के वास्तविक वाहक हैं।”
शहर में देर शाम तक श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा। पिपरिया ने शंकराचार्य जी के स्वागत में अपनी आस्था और संस्कृति दोनों का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।
