राजा हिरदेशाह लोधी शौर्य यात्रा: मप्र में पहली बार दिखा ऐसा सामाजिक-सांस्कृतिक कुम्भ, क्रांतिकारियों के सम्मान में जुटे हजारों लोग
भोपाल 28/04/2026 (दयाराम कुशवाहा ) भोपाल भोपाल। राजधानी भोपाल के जम्बूरी मैदान में आज एक भव्य एवं ऐतिहासिक सामाजिक-सांस्कृतिक सम्मेलन का आयोजन हुआ। यह अवसर था अंग्रेजों के विरुद्ध हुए प्रथम सशस्त्र स्वतंत्रता संग्राम ‘1842 बुंदेला विद्रोह’ के महानायक वीर राजा हिरदेशाह लोधी एवं अन्य क्रांतिकारियों की स्मृति में आयोजित शौर्य यात्रा का। कार्यक्रम में प्रदेशभर सहित विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए और अपने पूर्वजों के बलिदान को नमन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि 1842 के क्रांतिकारियों की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा तथा उनके योगदान पर शोध कार्य भी प्रारंभ किया जाएगा, जिससे नई पीढ़ी उनके त्याग और पराक्रम से परिचित हो सके।
इस अवसर पर प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद जिस प्रकार हजारों लोग अपने पूर्वजों के सम्मान में एकत्रित हुए हैं, वह अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन राजनीति से परे समाज के संस्कार, साहस और एकता का प्रतीक है।
श्री पटेल ने कहा कि समाज को शिक्षित होने के साथ-साथ संस्कारवान बनना भी आवश्यक है, तभी राष्ट्र सशक्त बनेगा।
उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके आह्वान पर देशभर में गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को पहचान दिलाने का कार्य तेज हुआ है।
श्री पटेल ने यह भी कहा कि “यह अत्यंत दुःखद है कि 1842 के अनेक बलिदानियों के वंशज आजादी के 75 वर्ष बाद भी भूमिहीन हैं। इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।”
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि राजा हिरदेशाह लोधी की युद्ध शैली छत्रपति शिवाजी महाराज के समान थी। उन्होंने युवाओं को साहस और आत्मबल के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के आयोजक एवं लोधी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष जालम सिंह पटेल ने कहा कि जैसे महाभारत में अभिमन्यु को घेरकर वीरगति दी गई थी, उसी प्रकार राजा हिरदेशाह लोधी को भी घेरकर शहीद किया गया। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहकर समाज और राष्ट्र के लिए कार्य करने का आह्वान किया।
क्रांतिकारियों के वंशजों का सम्मान
कार्यक्रम में विशेष रूप से वीर राजा हिरदेशाह लोधी के वंशज राजा कौशलेंद्र सिंह, ढिलवार के राजा नरवरशाह के वंशज रामकुमार सिंह तथा डेलनशाह की वंशज रंजीता सिंह का सम्मान किया गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
प्रसिद्ध लोक गायिका एवं आल्हा कलाकार संजो बघेल की ओजपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे जनसमूह में उत्साह और देशभक्ति का संचार किया।
ऐतिहासिक जनसमूह, महाकुंभ जैसा दृश्य
इस आयोजन में मध्यप्रदेश सहित उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र एवं अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। जम्बूरी मैदान में उपस्थित जनसमूह का उत्साह किसी महाकुंभ से कम नहीं था।
इस अवसर पर अवधूत सिद्ध महायोगी श्री दादा गुरु जी ने भी उपस्थित होकर आशीर्वचन दिए और कहा कि “जहां धैर्य है, वहीं धर्म है।”
सामाजिक एकता का संदेश
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसमें विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधि एक साथ उपस्थित रहे। यह आयोजन पूर्णतः सामाजिक और सांस्कृतिक स्वरूप का रहा, जिसमें लोधी, गोंड, आदिवासी, ठाकुर सहित विभिन्न समाजों ने ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प के साथ सहभागिता निभाई।
उपस्थित जनप्रतिनिधि
कार्यक्रम में संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री धर्मेंद्र लोधी, मंत्री विजय शाह, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते,
नर्मदापुरम सांसद दर्शन सिंह चौधरी, विधायक विश्वनाथ सिंह पटेल,विधायक प्रीतम सिंह लोधी, विधायक राजकुमार कराड़े, विधायक नीरज सिंह ठाकुर, विधायक अनुभा मुंजारे, विधायक रामसिया भारती, विधायक वीरेंद्र सिंह लंबरदार, विधायक प्रहलाद लोधी, विधायक महेंद्र नागेश, विधायक प्रेम शंकर वर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त अखिल भारतीय लोधी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विधायक विपिन कुमार डेविड, कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष कोकसिंह नरवरिया, राजगोंड महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीलकरण राज ठाकुर सहित विभिन्न विधायकगण एवं जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे।