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प्यासे यात्रियों के लिए मिसाल बना पिपरिया स्टेशन, 18 वर्षों से जारी नि:शुल्क जलसेवा की प्रेरक पहल

 


प्यासे यात्रियों के लिए मिसाल बना पिपरिया स्टेशन, 18 वर्षों से जारी नि:शुल्क जलसेवा की प्रेरक पहल
जलसेवक ट्रेन के इंतजार में

नर्मदापुरम् पिपरिया 19/5/2026 

( छगन कुशवाहा )

पिपरिया रेलवे स्टेशन, जो पचमढ़ी का प्रवेश द्वार माना जाता है, इन दिनों भीषण गर्मी में मानव सेवा की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है। यहां अंतरराष्ट्रीय पुष्टि मार्गीय वैष्णव परिषद द्वारा पिछले 18 वर्षों से लगातार ग्रीष्मकालीन जलसेवा अभियान चलाया जा रहा है। जब तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाता है, तब भी जलसेवक रेलवे स्टेशन पर डटे रहते हैं और ट्रेनों की जनरल बोगियों में बैठे यात्रियों को खिड़की तक पहुंचकर उनकी पानी की बोतलें भरकर ठंडा पानी उपलब्ध कराते हैं।

रेलवे स्टेशन पर जहां यात्रियों को एक लीटर पानी के लिए 15 से 20 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं, अपडाउन जबलपुर की ओर एवं इटारसी की ओर जाने वाली ट्रेनों मे वहीं यह सेवा सदस्य प्रतिदिन करीब 25-30 हजार लीटर पानी निशुल्क वितरित कर मानवता का संदेश दे रहा है। तेज गर्मी और तपती दोपहरी में यह सेवा यात्रियों के लिए किसी राहत से कम नहीं है।

जलसेवक विवेक महेश्वरी ने बताया कि इस सेवा की शुरुआत उस पीड़ा को देखकर हुई, जब यात्री पानी के लिए प्लेटफॉर्म पर इधर-उधर भटकते नजर आते थे। कई बार पानी भरने के प्रयास में ट्रेन चल पड़ती थी, जिससे यात्री छूट जाते थे या दुर्घटना का शिकार होने की आशंका रहती थी। इसी समस्या का समाधान निकालते हुए जलसेवकों ने ट्रेन की खिड़कियों तक पहुंचकर सीधे बोतलें भरने की पहल शुरू की।

उन्होंने बताया कि जब प्यासे यात्रियों के सूखे गले ठंडे पानी से तर होते हैं और वे मुस्कुराते हुए कहते हैं— “आपका बहुत-बहुत धन्यवाद, भगवान आपका भला करे” — तो वही शब्द इस सेवा को निरंतर जारी रखने की सबसे बड़ी प्रेरणा बन जाते हैं।

यह पहल सिर्फ जलसेवा नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, जागरूकता और मानवता का जीवंत उदाहरण है। जरूरत है कि देश के अन्य रेलवे स्टेशनों पर भी ऐसी प्रेरणादायक पहल शुरू हो, ताकि भीषण गर्मी में यात्रियों को राहत मिल सके और समाज में सेवा भाव की नई चेतना जागृत हो।

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