राजस्थान उच्च न्यायालय ने नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे 86 वर्षीय संत आसाराम को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उनकी आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा को बरकरार रखा है।
सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों से बरी कर दिया है, लेकिन पोक्सो (POCSO) और अन्य गंभीर धाराओं में उनकी दोषसिद्धि और सजा यथावत रहेगी। इसके साथ ही वर्तमान में अंतरिम चिकित्सा जमानत पर बाहर चल रहे आसाराम को तत्काल सरेंडर करने का आदेश दिया गया है।बुधवार को आए फैसले में कोर्ट ने जहां आसाराम की उम्रकैद को बरकरार रखा, वहीं मामले के दो अन्य सह-आरोपियों शिल्पी और शरतचंद्र को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया। निचली अदालत ने इन दोनों को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
