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बाल विवाह रोकथाम को लेकर मध्यप्रदेश सरकार का बड़ा फैसला- कलेक्टर से पटवारी तक की जवाबदेही तय

बाल विवाह रोकथाम को लेकर मध्यप्रदेश सरकार का बड़ा फैसला

ग्राम स्तर तक नियुक्त होंगे “बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी”
कानून के सख्त क्रियान्वयन की नई व्यवस्था लागू



बाल विवाह पर प्रभावी रोक लगाने और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित अभियानों को जमीनी स्तर तक मजबूत बनाने के उद्देश्य से राज्य शासन ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने पूर्व में जारी अधिसूचना को निरस्त करते हुए अब जिला से लेकर ग्राम स्तर तक विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों को “बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी” के रूप में अधिसूचित किया है। यह निर्णय बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा 16 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों के तहत लिया गया है। भारत सरकार के निर्देशों के अनुपालन में नई व्यवस्था लागू की गई है, जिससे बाल विवाह की रोकथाम, निगरानी और त्वरित कार्रवाई को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

जिला कलेक्टर से पटवारी तक की जवाबदेही तय

इस नई व्यवस्था के लागू होने से अब बाल विवाह रोकने के लिए एक बेहद मजबूत और त्रि-स्तरीय से भी बड़ा प्रशासनिक तंत्र काम करेगा। जिला स्तर पर इसकी कमान जिला कलेक्टर, अपर कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संभालेंगे, जबकि अनुभाग स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को यह जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह तहसील स्तर पर तहसीलदार और सभी नायब तहसीलदारों को कानूनन सशक्त बनाया गया है। ब्लॉक स्तर पर मोर्चा संभालते हुए जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के सेक्टर स्तर पर निगरानी रखने के लिए सभी राजस्व निरीक्षकों और महिला एवं बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव जमीनी स्तर पर करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में सीधे पटवारी को और शहरी क्षेत्रों में नगर पालिक निगमों के जोनल अधिकारी, राजस्व अधिकारी, सहायक राजस्व अधिकारी और स्वास्थ्य अधिकारियों को इस कानून को लागू करने का जिम्मा सौंपा गया है। इसके अलावा छोटे शहरों की नगर पालिका परिषदों और नगर परिषदों में मुख्य नगर पालिका अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, उप राजस्व निरीक्षक और मुख्य स्वच्छता निरीक्षकों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त किया गया। ग्राम स्तर तक प्रशासनिक जवाबदेही तय होने से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर प्रभावी अंकुश लगेगा तथा बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों को बेहतर संरक्षण मिलेगा।

तुरंत एफआईआर और कार्रवाई

अब अगर कहीं से भी बाल विवाह की सूचना मिलती है, तो वहां के पटवारी या सेक्टर पर्यवेक्षक कानूनी तौर पर सीधे दखल दे सकेगा और उसे रोकने के लिए अधिकृत होगा। अधिकारियों की इतनी बड़ी चेन होने से अब शादियों के सीजन में 'चाइल्ड मैरिज' पर पूरी तरह से नकेल कसी जा सकेगी। यह कदम महिला एवं बाल विकास विभाग और राजस्व विभाग के आपसी समन्वय से बालिकाओं के अधिकारों की सुरक्षा में एक गेम-चेंजर साबित होगी। राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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