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ई-टोकन के फेर में किसान,ई-टोकन बुक करने के बाद भी समिति के काट रहे चक्कर......

 किसानों की सुविधा सर्वोपरि: ई-टोकन व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता



देश में किसानों को पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ई-टोकन व्यवस्था लागू की गई है।

यह एक सराहनीय पहल है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में कुछ व्यावहारिक समस्याएँ सामने आ रही हैं,

जिनका समाधान किसानों के हित में किया जाना आवश्यक है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि कई किसानों को अपनी

तहसील या नजदीकी केंद्र के बजाय 50–60 किलोमीटर दूर स्थित केंद्रों पर यूरिया बुक करना पड़ रहा है।

इससे किसानों का समय, श्रम और परिवहन खर्च अनावश्यक रूप से बढ़ जाता है। लोगो का कहना है खेती के व्यस्त मौसम में

इतनी लंबी दूरी तय करना किसानों के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बनता है।

पिछले एक सप्ताह से रुकी बारिश जिले के कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी के रूप में शुरू हो गई है। जिन किसानों ने पहले बोवनी कर दी थी, अब उन्हें फसल का संवारनें के लिए सबसे ज्यादा यूरिया की जरुरत पढ़ रही है।

इस बार किसानों को ई-टोकन के माध्यम से खाद वितरित किया जा रहा है।

लोगो का कहना ई-टोकन के फेर में किसानों को यहां-वहां भटकना पड़ रहा है। जिसे जल्द से जल्द किसानों तक पहुंचाने का दावा किया जा रहा है।

खाद वितरण व्यवस्था को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से ई-टोकन व्यवस्था लागू की गई थी।

लेकिन इसमें भी कई खामियां उजागर हो रहीं हैं। किसानों को खाद लेने के लिए ई-टोकन के लिए ऑनलाइन पंजीयन कराना

पड़ रहा है। लेकिन इसके लिए उन्हें कई बार कंप्यूटर सेंटर के चक्कर काटने पड़ रहे है।

सबसे बड़ी परेशानी तो तब खड़ी हो रही है, जबकि उन्हें रात में खाद का स्टॉक ऑनलाइन दिख रहा है

और जब वे सुबह समिति पहुंच रहे हैं, तो वहां खाद नहीं मिल रहा। क्षेत्र के किसानों को डीएपी सिस्टम में नहीं हो रहा सुधार
के ई-टोकन सौ से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर के बुक हो रहे है।

लोगो का कहना है लेकिन विभाग इसमें सुधार नहीं कर पा रहा है। जानकारी के अनुसार डीएपी खाद की मांग सबसे ज्यादा है

ई-टोकन में सुधार को लेकर विभाग द्वारा कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

सिर्फ जिला या तहसील के टोकन बुकिंग की व्यवस्था नहीं की जा रही है।

लोगो का कहना है अभी स्थिति यह बनी है कि बीना का खाद दूसरे जिले या तहसीलों के किसान बुक कर रहे हैं,

जिससे स्टॉक खत्म हो जात है। ....

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