सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, तवा बफर रेंज में स्टाफ की कमी से जंगल सुरक्षा पर संकट
निलंबन, तबादलों और कर्मचारियों की कमी के बीच संवेदनशील तवा रेंज की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल; मानसून और नागद्वारी मेले के दौरान बढ़ी चिंता
नर्मदापुरम। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की प्रशासनिक व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। क्षेत्र संचालक एवं उप संचालक द्वारा हाल ही में जारी किए गए प्रशासनिक आदेशों के बाद तवा बफर रेंज में अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी की स्थिति बन गई है। वन्यजीव संरक्षण और जंगल की सुरक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि मानसून के संवेदनशील मौसम में इस तरह की स्थिति भविष्य में गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है।
मामले की शुरुआत बोरी अभ्यारण्य के अधीक्षक विनोद वर्मा के निलंबन से हुई। इसके बाद तवा रेंजर अमित चौहान, डिप्टी रेंजर राजेश उइके तथा उनके साथ चार नाकेदारों को भी निलंबित कर दिया गया। वहीं शासन स्तर पर अनुभवी रेंजर विजय कुमार बारस्कर और रामभरोष पाठक का अन्य स्थानों पर तबादला हो चुका है। इन घटनाक्रमों के बाद तवा बफर रेंज में अनुभवी अमले की कमी साफ दिखाई देने लगी है।
जानकारी के अनुसार तवा बफर रेंज सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की सबसे संवेदनशील रेंजों में शामिल है। इस रेंज में कुल 13 बीट हैं, लेकिन वर्तमान में केवल पांच नाकेदार ही पदस्थ हैं। इसके अलावा एकमात्र परिक्षेत्र सहायक ही कार्यरत हैं, जो स्वयं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में पूरे क्षेत्र की निगरानी, वन अपराधों की रोकथाम और वन्यजीव संरक्षण का दायित्व सीमित कर्मचारियों पर आ गया है।
वन विभाग के जानकारों का मानना है कि मानसून के दौरान जंगलों में अवैध गतिविधियों, लकड़ी की तस्करी, वन्यजीवों की सुरक्षा तथा गश्त की आवश्यकता सामान्य दिनों की तुलना में अधिक होती है। ऐसे समय में संवेदनशील रेंज का कर्मचारियों से लगभग खाली हो जाना प्रशासनिक निर्णयों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सूत्रों के अनुसार नर्मदापुरम स्थित कार्यालय से रेस्क्यू टीम के कुछ कर्मचारियों की अस्थायी ड्यूटी तवा रेंज में लगाई गई है, लेकिन उनमें से एक कर्मचारी चिकित्सा अवकाश पर चला गया है। इससे व्यवस्था और प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
उल्लेखनीय है कि नागद्वारी मेला क्षेत्र का प्रवेश मार्ग भी तवा रेंज के समीप पड़ता है। मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। ऐसे समय में वन क्षेत्र की सुरक्षा, यातायात प्रबंधन तथा वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त फील्ड स्टाफ का होना आवश्यक माना जाता है।
वन विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि जिन रेंजों में अपेक्षाकृत अधिक कर्मचारी उपलब्ध हैं, वहां से अस्थायी रूप से अनुभवी एवं ईमानदार कर्मचारियों की तैनाती तवा रेंज में की जानी चाहिए, ताकि जंगल की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।
हालांकि, इस पूरे मामले में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कर्मचारियों की कमी और प्रशासनिक फेरबदल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि प्रबंधन तवा बफर रेंज की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाता है।
संबंध में जब क्षेत्र उपसंचालक ऋषिका नेताम से बात करना चाही तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।