शिक्षक अटैचमेंट का खेल लंबे समय से अटैच रहकर बाबूगिरी में लिप्त
जिले के शिक्षा विभाग में अटैचमेंट का खेल जमकर चल रहा है। कई शिक्षक अपने मूल स्कूलों में पढ़ाने के बजाय जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय, विकासखंड शिक्षा कार्यालयों (बीईओ), जिला शिक्षाकेंद्र (डीपीसी) व जनपद शिक्षा केंद्र (बीआरसी) में वर्षों से जमे हुए हैं। इन पदों को मलाईदार माना जा रहा है। जहां प्रशासनिक काम के नाम पर यह शिक्षक स्कूलों में पढ़ाने की बजाय कार्यालयों में बैठकर काम कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा अटैचमेंट खत्म करने के स्पष्ट निर्देश जारी होने के बाद भी व्यवस्था में कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा। इससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। हैरानी की बात तो यह है कि यह शिक्षक भले ही डीईओ व बीईओ कार्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन इनका वेतन पदस्थ स्कूलों से ही निकल रहा है। वहीं विभागीय अधिकारी इस मामले में स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं। सबसे ज्यादा अटैचमेंट का खेल शिक्षा केंद्र में दिखाई दे रहा है यानि अटैच है, लेकिन इनके अटैचमेंट समाप्त नहीं हुए।
बीते 5 साल से अधिक समय से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अटैच हैं। जबकि इनका वेतन स्कूल से ही निकल रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कंप्यूटर शाखा अटैच है। तो कोई कही शाखा में अटेच है कोई खेल कूद शाखा में अटैच है कुल मिलाकर बच्चो के जीवन से खुला खिलवाड किया जा रहा है अब बच्चो की पढाई रिजेल्ट शाला में षिक्षक की कमी से इन्हे कोई मतलब नही सहाब जरा बाबूगिरी से षिक्षको को निजात तो दिलाये बच्चे कुछ ज्ञान हासिल कर ले ... ???