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सकल किसान समाज और संयुक्त किसान मोर्चा ने निरंकुश जेई महेन्द्र गौडे को शीघ्र निलंबित कर एफआईआर दर्ज करानी की करी मांग महासंघ ने सौंपा ज्ञापन

 किसानों के अपमान के विरोध में महासंघ ने सौंपा ज्ञापन, कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी



नर्मदापुरम जिले की बनखेड़ी तहसील के ग्राम चांदौन में मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के द्वारा दिनांक 21-05-2026 को ग्राम मलकजरा में ग्राहक संपर्क अभियान के तहत शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर का उद्देश्य विद्युत उपभोक्ताओं की समस्याओं का त्वरित निराकरण एवं उचित समाधान था परंतु इस ग्राहक संपर्क शिविर में ग्राम चांदौन में पदस्थ कनिष्ठ अभियंता जेई महेन्द्र गौड के द्वारा विद्युत वितरण कपंनी के उपभोक्ता और किसान भगवानदास पटैल ग्राम मलकजरा तहसील बनरखेड़ी जिला नर्मदापुरम को उनकी जायज समस्या के निराकरण का अनुरोध करने पर पूर्वाग्रह और द्वेष की भावना से अपमानित करते हुए शिविर से बाहर निकालने का अशोभनीय, अव्यवहारिक और अवैज्ञानिक कृत्य किया गया है जिससे कि समस्त किसान समाज स्वयं को अपमानित महसूस कर रहा है और किसानों में भारी आक्रोष है।

 सकल किसान समाज और संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा उक्त घमंडी और निरंकुश जेई महेन्द्र गौडे को शीघ्र निलंबित कर उन पर एफआईआर दर्ज की जाए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं हो।

तीन दिवस में एफआईआर दर्ज नहीं होने पर किसान आंदोलन के लिये मजबूर होंगे जिसकी संपूर्ण जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी।

नर्मदापुरम जिले की बनखेड़ी तहसील में किसानों के कथित अपमान का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के ब्लॉक अध्यक्ष नीरा पटेल के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार बनखेड़ी को ज्ञापन सौंपा गया।ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि 21 मई 2026 को ग्राम मलकजरा में मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी द्वारा आयोजित ग्राहक संपर्क शिविर के दौरान ग्राम चांदौन निवासी किसान भगवानदास पटेल अपनी बिजली समस्या के निराकरण की मांग लेकर पहुंचे थे। इस दौरान विद्युत विभाग के डीई महेंद्र गौंड द्वारा किसान के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें शिविर से बाहर निकाल दिया गया।महासंघ ने इस घटना को किसान समाज का अपमान बताते हुए संबंधित अधिकारी को तत्काल निलंबित कर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो किसान आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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