बड़ा खुलासा: नर्मदापुरम में शासकीय आवास बने 'विश्राम गृह', मुख्यालय छोड़ भोपाल से अप-डाउन कर रहे साहब!
महीनों से छुट्टी पर चल रहीं महिला डॉक्टर के नाम पर अलॉट बंगले पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा; अस्पताल में बढ़ी अव्यवस्था, डॉक्टरों में भारी रोष।
जिला मुख्यालय का हृदय स्थल कहा जाने वाला परशुराम चौक (बीएसएनएल चौराहा) इन दिनों प्रशासनिक लापरवाही और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का गवाह बना हुआ है। यहां स्थित आलीशान शासकीय आवास पिछले एक वर्ष से आम जनता और सरकारी कामकाज के लिए केवल एक 'शोपीस' बनकर रह गए हैं। नर्मदापुरम में पदस्थ कई रसूखदार अधिकारियों ने इन सरकारी बंगलों को अपनी ऐश-ओ-आराम की 'पनाहगाह' और 'विश्राम गृह' बना दिया है, जिससे न सिर्फ सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि आम जनता को मिलने वाली सुविधाएं भी वेंटिलेटर पर आ गई हैं।
सोमवार-मंगलवार को चमकते हैं बंगले, बाकी दिन 'भूतहा' सन्नाटा
चौंकाने वाली बात यह है कि नर्मदापुरम जिला मुख्यालय में पदस्थापना होने के बावजूद कई बड़े अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर प्रांतीय राजधानी भोपाल या अन्य नजदीकी शहरों से रोजाना 'डेली अप-डाउन' कर रहे हैं। इन अधिकारियों को आवंटित शासकीय आवास सिर्फ सोमवार और मंगलवार को होने वाली समय-सीमा (TL) बैठक या जनसुनवाई के दौरान ही रोशन होते हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय त्योहारों (स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस) पर इन बंगलों की सफाई करवाकर इन्हें चमकाया जाता है। बाकी के पांच दिन ये आलीशान सरकारी आवास सिर्फ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हवाले रहते हैं, जो यहां सिर्फ पहरेदारी करते नजर आते हैं।
अवकाश का खेल और वेतन आहरण में अनियमितता के आरोप
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष 6 जून 2025 को स्थानांतरित हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉक्टर दिनेश देहलवार का शासकीय आवास उनकी पत्नी डॉक्टर त्रिवेणी बोकारे देहलवार (जो कि जिला चिकित्सालय नर्मदापुरम में शासकीय चिकित्सक हैं) के नाम पर आवंटित है।
हैरानी की बात यह है कि डॉक्टर त्रिवेणी बोकारे देहलवार पिछले लंबे समय से विभिन्न प्रकार के अवकाशों (जैसे- चिकित्सा अवकाश, अर्जित अवकाश और चाइल्ड केयर लीव - CCL) की पात्रता का सहारा लेकर लगातार ड्यूटी से नदारद हैं। चर्चा तो यह भी है कि इस लंबी अनुपस्थिति के बावजूद वेतन आहरण से संबंधित प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की जा रही हैं, जो सीधे तौर पर जांच का विषय है।
जिला अस्पताल में महिला डॉक्टरों पर बढ़ा काम का बोझ, रोष व्याप्त
एक तरफ जहां रसूखदार डॉक्टर छुट्टियों का आनंद ले रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नर्मदापुरम जिला चिकित्सालय में महिला चिकित्सकों की भारी कमी हो गई है। लगातार डॉक्टरों के गायब रहने के कारण अस्पताल की पूरी व्यवस्था चरमरा गई है। इमरजेंसी और आकस्मिक ड्यूटी का पूरा भार बची हुई महिला डॉक्टरों के कंधों पर आ गया है, जिससे अस्पताल स्टाफ के भीतर भारी असंतोष और रोष व्याप्त है।
सरकारी आवास की आड़ में चल रहे निजी 'अस्पताल'
मामला यहीं नहीं रुकता, सूत्रों का दावा है कि कुछ रसूखदार शासकीय चिकित्सक जिनके स्वयं के निजी मकानों को किराये पर देकर इन वीआईपी सरकारी आवासों का उपयोग अपने निजी फायदे के लिए कर रहे हैं। नियमों के मुताबिक सरकारी आवास में किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि प्रतिबंधित है, लेकिन नर्मदापुरम में सरकारी आवासों के भीतर 'निजी क्लीनिक' की आड़ में पूरे के पूरे प्राइवेट अस्पताल संचालित किए जा रहे हैं।
बड़ा सवाल: कोई तो इन्हें रोके, कोई तो इन्हें टोके!
जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाले इस सिस्टम में आखिर इतनी बड़ी लापरवाही किसके संरक्षण में हो रही है? क्या जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इस पूरे मामले से अनजान हैं, या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं? अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद जिला कलेक्टर और शासन स्तर पर इन 'लापता' डॉक्टरों और नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर क्या सख्त कार्रवाई की जाती है।