मोटर वाहन एक्ट के प्रावधानों का हो रहा खुला उल्लंघन, लोगों को रहस्यमय लग रही आरटीओ के अधिकारियों की चुप्पी
शहर की सड़कों पर काली फिल्म (ब्लैक टिंटेड ग्लास) लगी कारें खुलेआम फर्राटा भर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और मोटर वाहन एक्ट के प्रावधानों का खुला उल्लंघन हो रहा है। इसके बावजूद आरटीओ के अफसर मूकदर्शक बने हुए हैं। अफसरों की यह चुप्पी समाज के प्रबुद्ध वर्ग को हैरान कर रही है। लोगों का कहना है कि काली फिल्म में मादक पदार्थों की तस्करी के नियमित कार्रवाई होना आवश्यक मामले भी सामने आ चुके हैं। इनमें आपराधिक गतिविधियों की आशंका भी बनी रहती है, फिर भी जिम्मेदार नहीं चेत रहे हैं। इस तरह के वाहन चालकों पर नियमित रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। नागरिकों का कहना है कि अत्यधिक काले शीशों के कारण वाहन चालक की दृश्यता प्रभावित हो सकती है। इसी के चलते रात के समय और खराब मौसम में दुर्घटनाओं का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। इसे देखते हुए आरटीओ एवं ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कर कारों में लगाई काली फिल्में।
मादक पदार्थों की तस्करी में इस्तेमल के आ चुके हैं मामले ब्लैक फिल्म लगी कारों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से इन वाहनों का कई बार इस्तेमाल अवैध शराब, गांजा तथा अन्य प्रतिबंधित मादक पदार्थों के परिवहन में भी होने के मामले सामने आ चुके हैं। कुछ दिन पूर्व ही पुलिस ने अलग-अलग वाहनों को भारी मात्रा में अवैध शराब ले जाते हुए पकड़ा था। इसके अलावा आपराधिक गतिविधियों में लिप्त असामाजिक तत्वों के भी अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के बाद ऐसे ही वाहनों में ही फरार होने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद आरटीओ व यातायात पुलिस की चुप्पी कई तरह के संदेहों को जन्म देती है।
जिम्मेदारों को संयुक्त रूप से कार्रवाई कर सभी चार-पहिया वाहनों में लगीं ब्लैक फिल्म को अविलंब निकलवा देना चाहिए। यदि संबंधित अधिकारी लगातार जांच अभियान चलाएं तो ब्लैक फिल्म लगे वाहनों से होने वाले अपराधों एवं नियमों की अवहेलना पर काफी हद तक अंकुश लग सकता है।
