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पिपरिया में ऐतिहासिक श्रीराम यज्ञ,मानस सम्मेलन एवं नवान्ह पारायण का शुभारंभ,1954 से चली आ रही है परंपरा




पिपरिया में ऐतिहासिक श्रीराम यज्ञ,मानस सम्मेलन एवं नवान्ह पारायण
 का शुभारंभ,1954 से चली आ रही है परंपरा


नर्मदापुरम् 23/1/206(छगन कुशवाहा पिपरिया) नर्मदापुरम्प पिपरिया,
नगर के तुलसी नगर क्षेत्र में गुरुवार 22 जनवरी को ऐतिहासिक श्रीराम यज्ञ का विधिवत शुभारंभ हुआ। यज्ञशाला पूजन एवं देव आव्हान के साथ पौराणिक परंपरा की शुरुआत की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर धर्मलाभ अर्जित किया।

यज्ञशाला समिति के अनुसार, पिपरिया का यह श्रीराम यज्ञ नगर की एक प्राचीन एवं विशिष्ट धार्मिक परंपरा है, जिसका आयोजन वर्ष 1954 से प्रत्येक तीन वर्ष में किया जाता रहा है। इस यज्ञ की स्थापना करपात्री महाराज द्वारा कराई गई थी। बीते 60 वर्षों से अधिक समय से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है।

कार्यक्रम के तहत 22 जनवरी को यज्ञशाला पूजन एवं देव आव्हान संपन्न हुआ। 23 जनवरी को चंदन की लकड़ी के घर्षण से यज्ञ वेदी में अग्नि प्रज्वलन किया जाएगा तथा नवान्ह पारायण पाठ प्रारंभ होंगे। 24 जनवरी से 30 जनवरी तक प्रवचन सत्र आयोजित किए जाएंगे। 28 जनवरी को ब्राह्मण बालकों का यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न होगा, जबकि 31 जनवरी को पूर्णाहुति के साथ यज्ञ का समापन होगा।



यज्ञ समिति के अध्यक्ष श्याम सुंदर सोनी, सचिव चंद्र प्रकाश गोयदानी, राजेंद्र हरदेनिया एवं श्याम सुंदर हुरकट ने प्रेस को संबोधित करते हुए आयोजन की विस्तृत जानकारी दी। यज्ञ का संचालन वाराणसी के यज्ञाचार्य राजेंद्र कुमार मिश्रा द्वारा किया जा रहा है।

प्रवचन देने वाले संतों में जगद्गुरु रामानुजाचार्य, स्वामी लक्ष्मणाचार्य (मिर्जापुर), ब्रह्मचारी महाराज (बपौलीधाम मागरौल), सुरेश शरण महाराज (महंत, श्री बालाजी मंदिर हिंगनघाट), सुश्री शांति श्रिया मानस हंस (अयोध्या) तथा युवा संत शिवम शुक्ला (प्रयागराज) शामिल हैं।



समिति सदस्य राजेंद्र हरदेनिया ने बताया कि पिपरिया के श्रीराम यज्ञ की विशेषता यह है कि यहां अब तक देश के ख्यातिलब्ध संतों के साथ-साथ ईसाई एवं मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी श्रीराम कथा का वाचन किया है। उन्होंने बताया कि बेल्जियम के प्रसिद्ध विद्वान फादर कामिल बुल्के ने हिंदी सीखकर वर्ष 1970 में पिपरिया में राम कथा पर प्रवचन दिए थे। इसी तरह राजेश मोहम्मद द्वारा भी इस यज्ञ में प्रवचन दिए जा चुके हैं।



यज्ञ समिति द्वारा 23 से 25 जनवरी तक विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागियों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया है। पिपरिया के इस ऐतिहासिक श्रीराम यज्ञ को देखने और प्रवचन सुनने के लिए हर वर्ष दूर-दराज से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

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