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गुटखा-पान मसाला की कालाबाजारी से बिगड़ा बाजार, बड़े व्यापारियों की मनमानी से उपभोक्ता परेशान

 

गुटखा-पान मसाला की कालाबाजारी से बिगड़ा बाजार, बड़े व्यापारियों की मनमानी से उपभोक्ता परेशान



नर्मदापुरम् पिपरिया 29/3/2026 

( छगन कुशवाहा )

पिपरिया. शहर में गुटखा और पान मसाला की कालाबाजारी अब खुलकर सामने आने लगी है। खास बात यह है कि इस पूरे खेल में छोटे दुकानदार नहीं, बल्कि बड़े थोक व्यापारी ही मुख्य भूमिका निभा रहे हैं, जिससे बाजार का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है। प्रशासन की अनदेखी के चलते यह अवैध कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है।


जानकारी के अनुसार, एमआरपी 18₹ वाला गुटखा 25-30₹ मे और एमआरपी 35 रुपए वाला गुटखा खुद खुदरा दुकानदारों को ही अधिक कीमत पर दिया जा रहा है। ऐसे में दुकानदारों को मजबूरी में वही पाउच 45 से 50 रुपए तक बेचना पड़ रहा है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है, जबकि गुस्सा दुकानदारों पर निकल रहा है।


बिना बिल सप्लाई, मनमाने रेट तय
स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि बड़े थोक विक्रेता बिना पक्के बिल के गुटखा सप्लाई कर रहे हैं। इससे न सिर्फ टैक्स की चोरी हो रही है, बल्कि वे अपनी मर्जी से कीमत तय कर रहे हैं। बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बनाकर दाम बढ़ाए जा रहे हैं।


कंपनियों और थोक व्यापारियों की मिलीभगत के आरोप
व्यापारियों का कहना है कि पहले कंपनियों ने लोगों में गुटखा की लत डाली और अब उसी का फायदा उठाकर कीमतें बढ़ाई जा रही हैं। थोक स्तर पर सप्लाई नियंत्रित कर बाजार में महंगाई का माहौल बनाया जा रहा है, जिससे बड़े व्यापारी मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।


दुकानदारों पर दोहरी मार
स्थानीय दुकानदार प्रदीप चौरसिया का कहना है कि महंगे रेट पर माल मिलने से ग्राहकी प्रभावित हो रही है। ग्राहक महंगाई के लिए दुकानदारों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जबकि असली खेल थोक स्तर पर हो रहा है।




प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
पूरे मामले में प्रशासन की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है। खुलेआम एमआरपी से अधिक कीमत पर बिक्री और बिना बिल के सप्लाई के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।




कार्रवाई की मांग तेज
स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने मांग की है कि थोक व्यापारियों की जांच कर उनके स्टॉक, बिलिंग और सप्लाई सिस्टम की सख्ती से जांच की जाए। साथ ही एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने वालों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि बाजार में पारदर्शिता लौट सके और आम जनता को राहत मिल सके।



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