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मंदिर में मासूम से हैवानियत की कोशिश, कोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा - 2 हजार जुर्माना भी लगा

 


मंदिर में मासूम से हैवानियत की कोशिश, कोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा - 2 हजार जुर्माना भी लगा


 पिपरिया कोर्ट का बड़ा फैसला, POCSO एक्ट में दोषी हल्कोरी उर्फ हरिराम को मिली कड़ी सजा

नर्मदापुरम् पिपरिया 23/4/2026 

( छगन कुशवाहा )

पिपरिया. हनुमान मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर मासूम बच्ची के साथ घिनौनी हरकत करने वाले आरोपी को कोर्ट ने करारा सबक सिखाया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमति अर्चना रघुवंशी की अदालत ने आरोपी हल्कोरी उर्फ हरिराम को POCSO एक्ट की धारा 5/6 सहपठित धारा 10 के तहत 10 साल के कठोर कारावास और 2 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।



क्या था पूरा मामला 

17 फरवरी 2023 को दोपहर 1 से 2 बजे के बीच गांव के हनुमान मंदिर में आरोपी हल्कोरी पटेल बच्ची के साथ अश्लील हरकत कर रहा था। उसी समय गांव के धर्मेंद्र की नजर पड़ी तो उसने देखा कि आरोपी की पेंट खुली थी और वह बच्ची की गर्दन पकड़कर जबरदस्ती कर रहा था। धर्मेंद्र को देखते ही आरोपी ने बच्ची को छोड़ दिया और धर्मेंद्र ने उसे मंदिर से भगा दिया।


 
घटना की जानकारी मंदिर के बाहर बैठे अमरचंद और सरदार सिंह को भी दी गई। बाद में जब पीड़िता की मां और दादी आरोपी के घर पहुंचीं तो उसने गलती मानकर माफी मांग ली। गांव में पंचायत कर आरोपी को दंडित करने की बात कही गई, लेकिन अगले ही दिन से आरोपी गांव से गायब हो गया। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई।



मां ने दर्ज कराई FI

जब गांव में कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़िता की मां ने मंगलवारा थाना पिपरिया पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने अपराध क्रमांक 60/23 पर धारा 354, 354-ए IPC और POCSO एक्ट की धारा 9/10 के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के बाद आरोपी पर धारा 354, 354-ए, 376 एबी, 511 IPC तथा POCSO की धारा 5/6, 18, 11/12, 9/10 के तहत चालान पेश किया गया।

10 गवाहों ने खोली पोल
कोर्ट में विशेष लोक अभियोजक एवं एडीपीओ बाबूलाल काकोड़िया ने शासन की ओर से पैरवी की। अभियोजन ने 10 गवाह पेश किए। सभी सबूतों और दलीलों से सहमत होते हुए कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देकर 10 साल की सजा सुना दी।



गांव में चर्चा: देर से मिला न्याय, पर मिला तो सख्त मिला
फैसले के बाद गांव में चर्चा है कि भले ही कार्रवाई में देरी हुई, लेकिन कोर्ट ने सख्त सजा देकर एक मिसाल पेश की है। मंदिर जैसे स्थान पर ऐसी हरकत करने वाले को बख्शा नहीं जाएगा, यह संदेश साफ गया है।

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