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गुरुजन का सम्मान, फिर कविताओं का घमासान

 

                               गुरुजन का सम्मान, 

 गुरुजन का सम्मान, फिर कविताओं का घमासान

पंडित रामकृष्ण पाण्डे की स्मृति में देर रात तक गूंजा काव्य रस


नर्मदापुरम् पिपरिया 12/4/2026 

( छगन कुशवाहा )

पिपरिया। नर्मदापुरम जिले के पिपरिया में शनिवार रात साहित्य और सम्मान का अनोखा संगम देखने को मिला। साहित्यकार स्व. पंडित रामकृष्ण पाण्डे की स्मृति में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में पहले गुरुजनों का सम्मान हुआ, इसके बाद देर रात तक कविताओं का घमासान चलता रहा।


मंगलवार बाजार में 11 अप्रैल की रात 9 बजे से शुरू हुए इस आयोजन की शुरुआत आयोजक कवि हरीश पाण्डे एवं मित्रता परिवार ने गुरु सम्मान से की। मंच से उन चार गुरुओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने आयोजक को प्रारंभिक शिक्षा दी थी। सेवानिवृत्त शिक्षक एवं गीतकार रामकिसन ठाकुर, एसएन साहू, एमएल सराठे और एमएल नायक को शाल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह व डायरी-पेन भेंट कर सम्मानित किया गया।


कार्यक्रम में पाण्डे परिवार के ज्येष्ठ महंत पवनसुत दास पाण्डे ने स्व. पंडित रामकृष्ण पाण्डे के सरल व्यक्तित्व और साहित्य साधना को याद करते हुए अतिथियों का स्वागत किया।




इसके बाद देशभर से आए कवियों का सम्मान कर काव्यपाठ का सिलसिला शुरू हुआ। ललितपुर से आई कवयित्री मंजू भारद्वाज कटारे ने मां शारदे की वंदना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। स्थानीय गीतकार रामकिसन ठाकुर ने मुक्तक और गीतों से रंग जमाया, जबकि हर्रई के कवि भोले नेमा ‘चंचल’ ने शानदार प्रस्तुति दी।


ओज कवि विनीत नामदेव ने अपने जोशीले काव्यपाठ से माहौल में देशभक्ति का जज्बा भर दिया, जिससे श्रोता ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों से गूंज उठे। कवयित्री मंजू कटारे ने अपनी प्रस्तुति से खूब तालियां बटोरीं।



नागपुर के कवि आरबी गुप्ता ‘अहसास’ ने संवेदनशील रचनाओं से श्रोताओं को भावुक किया, वहीं उज्जैन से आए राहुल शर्मा ने ओजपूर्ण काव्यपाठ से समां बांध दिया। गीतकार विनोद सनोडिया ‘अंजान’ ने अपने गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।



कार्यक्रम के संयोजक हरीश पाण्डे ने भी संक्षिप्त लेकिन प्रभावी काव्यपाठ किया, जिसे श्रोताओं ने सराहा। मंच संचालन मुलताई के दीपक साहू ‘सरस’ ने प्रभावी अंदाज में किया। उन्होंने अपने मुक्तक और धारा 370 पर आधारित रचना से भी खूब सराहना पाई।


कार्यक्रम के अंत में महंत पवनसुत दास पाण्डे ने आभार व्यक्त किया। देर रात तक चले इस कवि सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे और साहित्य की सरिता में डूबे रहे।



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