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सड़क पर जलता हुआ कचरा, खेतों में जलने वाली नरवाई (पराली) से भी अधिक खतरनाक

 सड़क पर जलता हुआ कचरा, खेतों में जलने  नरवाई (पराली) से भी अधिक खतरनाक हो सकता है।



 कचरे में मौजूद प्लास्टिक, रबर, इलेक्ट्रॉनिक्स और केमिकल मिलकर जलने पर बेहद जहरीली गैसें छोड़ते हैं, जो इंसानी स्वास्थ्य और पर्यावरण को तुरंत नुकसान पहुंचाती हैं।

नरवाई और सड़क पर जलते कचरे में मुख्य अंतर और इसके खतरनाक होने के कारण हैं:


1. अत्यधिक जहरीली गैसों का उत्सर्जन

• प्लास्टिक और केमिकल: शहरी कचरे में भारी मात्रा में प्लास्टिक (PVC), पॉलिथीन और नायलॉन होता है। इन्हें जलाने से डाइऑक्सिन (Dioxins), फ्यूरॉन (Furans) और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जानलेवा गैसें निकलती हैं।

• नरवाई की तुलना में: नरवाई (सूखी फसल के अवशेष) मुख्य रूप से जैविक सामग्री है। इसके जलने से धुआं और पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5) निकलता है, लेकिन कचरे की तरह खतरनाक सिंथेटिक केमिकल नहीं निकलते।


2. सीधे इंसानी आबादी के करीब होना

• आबादी के बीच: सड़क किनारे कचरा अक्सर आवासीय क्षेत्रों, बाजारों या रास्तों पर जलाया जाता है। इसका धुआं सीधे तौर पर राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों के फेफड़ों में जाता है।

• नरवाई की तुलना में: नरवाई आमतौर पर खुले खेतों में, आबादी से थोड़ी दूर जलाई जाती है (हालांकि इसका धुआं हवा के साथ शहरों तक पहुंचता है, लेकिन तत्काल प्रभाव सड़क किनारे कचरे जितना सीधा नहीं होता)।


3. गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं

सड़क पर जलते कचरे के धुएं से सांस लेने पर निम्नलिखित गंभीर बीमारियां हो सकती हैं:

• फेफड़ों का कैंसर और दमा (Asthma) का दौरा

• आंखों में तेज जलन और त्वचा की एलर्जी

• नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) और लिवर को नुकसान

4. सड़क दुर्घटनाओं का खतरा


• सड़क किनारे जलते कचरे से अचानक निकलने वाला घना धुआं विजिबिलिटी (दृश्यता) को शून्य कर देता है। इससे वाहनों के आपस में टकराने और गंभीर सड़क हादसे होने का खतरा बहुत बढ़ जाता है।


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