जिले में 'जहर' की तस्करी पर आबकारी विभाग मौन,
सागर जिले में जहरीली देशी शराब से हुईं मौतों के बाद भी जिले का आबकारी विभाग पूरी तरह से सुस्त बना हुआ है। प्रदेश शासन के विशेष अभियान चलाने के आदेश के बावजूद आबकारी विभाग जहरीली शराब की तस्करी पर अधिकांश समय मौन है। जबकि जिला पुलिस लगातार अवैध शराब की बड़ी-बड़ी खेप पकड़ रही है। लोगो का कहना है की तस्करी करने वाले हर बार की तरफ लापता-अज्ञात बताए गए हैं। बता दें कि जिले में अब तक जितनी भी बार अवैध शराब की जब्ती हुई है, उसमें तस्कर के नाम सामने नहीं आ सके हैं। वाहन चालकों पर और छोटे-मोटे लोगों पर मुकदमा कायमी भर हो सकी है।
यह है घटनाक्रमः पुलिस ने बताया कि 31 अक्टूबर को मुखबिर से सूचना मिली थी कि गाडरवारा करेली रोड पर भारी मात्रा में अवैध शराब की तस्करी की जा रही है। इस पर पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया के मार्गदर्शन, एसडीओपी गाडरवारा शुभम सिंह ठाकुर के नेतृत्व में टीम का गठन किया। टीम ने घेराबंदी करते हुए शक्कर नदी पुल पर बोलेरो एमपी 49 टी 0946 को रोकने की कोशिश की। पुलिस का दावा है कि चालक पुलिस को देखकर वाहन छोड़ फरार हो गया। खैर, टीम ने जब वाहन की तलाशी ली तो इसमें 11 पेटी देशी प्लेन शराब एवं 39 पेटी देशी मसाला शराब को मिलाकर कुल 50 पेटी में 2500 पाव यानी कुल 450 बल्क लीटर अवैध शराब जब्त हुई। इसकी कीमत करीब तीन लाख रुपए, वहीं वाहन पर
कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता कर रहा आबकारी विभाग
विभाग द्वारा लगातार पकड़ी जा रही अवैध शराब की बंपर खेप दर्शा रही है कि आबकारी विभाग के अधिकारी जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभा रहे हैं। जानकारों के अनुसार अधिकांश शराब की तस्करी लाइसेंसी ठेकेदारों के बीच व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता का परिणाम है। जिला प्रशासन चाह ले तो वाहन के नंबर, वेयरहाउस से हुई निकासी समेत मुख्य मार्गों पर मौजूद सीसीटीवी कैमरों की मदद से तस्करों के नाम सामने आ जाएंगे। जानकार ये तक कह रहे हैं कि पासिंग के वाहन में इतनी बल्क मात्रा में शराब की तस्करी होना साफ दर्शा रहा है कि ये शराब जिले के ही किसी ठेकेदार की है। अब सवाल ये है कि ये नकली है या फिर असली। यदि शराब असली है तो फिर तस्करी करवाने वाले ठेकेदार का नाम पता करना आबकारी विभाग के लिए कोई मुश्किल काम नहीं हैं। खैर, सूत्र बता रहे हैं कि शराब तस्करी के अवैध खेल में इस प्रकरण में भी वास्तविक तस्करों को बचाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। कोशिश हो रही है कि के विरुद्ध आबकारी अधिनियम के तहत मामला पंजीबद्ध किया जाए.......